कटिहार में मजबूर मज़दूर अस्पताल 

कटिहार के साथ-साथ कोशी और सीमांचल में बड़े पैमाने पर प्रवासी मजदूर कोरोना बंदी के बाद परदेश में काम धंधा ठप होने से घर लौट चुके है, इस बीच विधानसभा चुनाव की दस्तक से इस बार की राजनीति मजदूरों के इर्द-गिर्द घूमने लगी है और मजबूर मजदूरो के आक्रोश को आधार मानकर विपक्ष जहाँ इसे अपने वोट बैंक बनाने की जुगत में है, वहीं सरकार मजदूरों को सुविधा देकर अपने आप को मजदूर हितैषी साबित करने में जुटी हुई है। लेकिन  मजदूर  केवल राजनीति का मोहरा ही है और उनके सुविधाओं के लिए सरकार कितना जागरूप है इसे समझने के लिए कोशी और सीमांचल के 10 जिलों के लिए बनी कटिहार राज्य बीमा चिकित्सालय(ईएसआईसी) का हाल देखिए, जहा भगवान भरोसे एक क्लर्क के भरोसे दस जिलों के मजदूरो का इलाज होता है।इस अस्पताल में लग-भग 5 हज़ार ईएसआई बीमित मजदूरों और उनके परिवार के इलाज के लिए रजिस्ट्रेशन है और बड़ी संख्या में आए प्रवासी मजदूरो के ईएसआई का इस अस्पताल में रेजिस्ट्रेशन होना है मगर  अस्पताल में कोई डॉक्टर तैनात है ही नहीं है,एक लिपिक के भरोसे 10 जिलों के मजदूरों का इलाज कैसे भगवान भरोसे चलता है और ऐसे में मजदूर ईएसआई कार्ड रखने के बावजूद इलाज के नाम पर मजबूर है। सुविधाओं के लिए जूझते ईएसआई अस्पताल के हालात पर मजदूर और मजदूर संगठन  के नेताओं ने कहाँ कि कई बार सरकार तक आंदोलन के माध्यम से  बात पहुंचाने की कोशिश भी किया गया है लेकिन अब तक हाल जस का तस है, उधर अस्पताल में तैनात एकमात्र लिपिक कहते हैं कि डॉक्टर के ट्रांसफर के बाद दूसरे डॉक्टर को जिम्मेदारी मिला है पर वह आए ही नहीं, इसलिए फिलहाल अगर दूरदराज से मजदूर इलाज के लिए आते भी हैं तो उनको ही आवेश में आकर बातें सुना कर चले जाते हैं, मगर वह करे तो क्या करें अब तो एक महीना बाद वह भी रिटायर होने वाले हैं।ऐसे में एक तरफ मजदूरों को लेकर सरकार और विपक्ष की हितेषी होने होने की होर के बीच हकीकत बेहद ही दर्दनाक है।

 

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